Nifty 50 TradingView Complete Guide (Beginners + Strategy + Indicators)

स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग करने वाले हर बिगिनर का एक ही सवाल होता है➡️मैं ट्रेडिंगव्यू पर निफ्टी 50 को कैसे एनालाइज़ करूँ। = अगर आप ट्रेडिंग View का सही इस्तेमाल करना सीख गए हैं, तो आप मार्केट का ट्रेंड, एंट्री-एग्जिट टाइमिंग, सपोर्ट-रेजिस्टेंस, ब्रेकआउट-ब्रेकडाउन सब पहचान सकते हो।

इस आर्टिकल में हम Nifty 50 एनालिसिस, बेस्ट इंडिकेटर्स, ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी, चार्ट रीडिंग, बिगिनर मिस्टेक्स, रिस्क मैनेजमेंट और डेली रूटीन सब कुछ ब्रेकडाउन कर रहे हैं।

Nifty 50 TradingView Complete Guide (Beginners + Strategy + Indicators)

1.Nifty 50 Trading view? (In Simple Language)

Nifty 50 भारत का सबसे पॉपुलर स्टॉक मार्केट इंडेक्स है, जो 50 टॉप कंपनियों का एवरेज मूवमेंट दिखाता है+इसे देखकर, आप भारतीय मार्केट के ओवरऑल मूड का अंदाज़ा लगा सकते हैं—बुलिश, बेयरिश, या साइडवेज़।

बैंक, IT, फार्मा, ऑटो, एनर्जी—सभी सेक्टर इसमें शामिल हैं। डेली ट्रेडर्स और लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर्स इसे फॉलो करते हैं। 👉ग्लोबल इवेंट्स का असर सबसे पहले Nifty में दिखता है। Nifty 50 चार्ट TradingView पर अवेलेबल है, जहाँ आप इंडिकेटर्स, पैटर्न और टाइमफ्रेम का इस्तेमाल करके इन-डेप्थ एनालिसिस कर सकते हैं।

2. Nifty 50 TradingView? Why is it the best platform for Nifty trading.

TradingView एक एडवांस्ड चार्टिंग प्लेटफॉर्म है जहाँ आप रियल-टाइम चार्ट, इंडिकेटर, ड्रॉइंग टूल और एनालिसिस पब्लिश कर सकते हैं + Nifty ट्रेडिंग के लिए TradingView के फायदे। 1.रियल-टाइम Nifty 50 चार्ट। 2. 100+ इंडिकेटर। 3. 1 मिनट से 1 महीने तक के टाइमफ्रेम। 4. ट्रेंडलाइन, फिबोनाची, RSI, MACD, वॉल्यूम – सभी टूल। 5. मोबाइल और लैपटॉप दोनों पर स्मूथ 6. बैकटेस्टिंग संभव है

यह शुरुआती लोगों के लिए सबसे आसान प्लेटफॉर्म है क्योंकि इंटरफ़ेस बहुत साफ है।

3. Nifty 50 TradingView (Step-by-Step Guide)

स्टेप 1: TradingView.com खोलें➡️ सर्च बॉक्स में, टाइप करें: NIFTY 50 Index (NSE)

स्टेप 2: एक टाइमफ्रेम चुनें➡️ 1 दिन (पोजीशनल व्यू) 15 मिनट, 5 मिनट (इंट्राडे) 1 घंटा (स्विंग ट्रेडिंग)

स्टेप 3: इंडिकेटर्स जोड़ें➡️ (सबसे अच्छे इंडिकेटर्स नीश के बारे में डिटेल में बताया गया है)

स्टेप 4: एक ट्रेंडलाइन बनाएं➡️ सपोर्ट, रेजिस्टेंस और ब्रेकआउट ज़ोन साफ़ दिख रहे हैं।

स्टेप 5: वॉल्यूम और प्राइस एक्शन चेक करें➡️ आपको मार्केट की दिशा का कन्फर्मेशन मिलता है।

4. Nifty 50 Tradingview? How To Analyze (Professional Method)

यह सबसे अच्छा एनालिसिस फ्लो है जिसे प्रो ट्रेडर्स फॉलो करते हैं:

(A) मार्केट स्ट्रक्चर चेक करें✅हायर हाई → अपट्रेंड✅लोअर लो → डाउनट्रेंड✅सेम हाई/लो → साइडवेज़

(B) मेजर सपोर्ट और रेजिस्टेंस मार्क करें✅जहां प्राइस पॉज़ होता है → डिसीजन पॉइंट✅जहां प्राइस रिवर्स होता है → अपॉर्चुनिटी

(C) ट्रेंड कन्फर्मेशन इंडिकेटर्स अप्लाई करें✅EMA + RSI कॉम्बो✅ट्रेंड स्ट्रेंथ के लिए MACD✅स्ट्रेंथ के लिए वॉल्यूम।

(D) ब्रेकआउट/ब्रेकडाउन की स्टडी करें✅स्ट्रॉन्ग वॉल्यूम + स्ट्रॉन्ग कैंडल = रिलाएबल ब्रेकआउट✅वीक वॉल्यूम = फेक ब्रेकआउट का चांस

(E) न्यूज़ और इवेंट्स चेक करें👉FII/DII डेटा, RBI पॉलिसी, ग्लोबल मार्केट सेंटिमेंट सीधे Nifty को मूव करते हैं।

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5. Nifty 50 TradingView Best Indicators for Full Breakdown.

1. EMA (एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज) – ट्रेंड फाइंडर।➡️ इस्तेमाल करें: ट्रेंड की दिशा पहचानने के लिए बेस्ट कॉम्बिनेशन: EMA 20 + EMA 50-कैसे इस्तेमाल करें।➡️ EMA 20 > EMA 50 → अपट्रेंड + EMA 20 < EMA 50 → डाउनट्रेंड 👉EMA क्रॉस = मोमेंटम चेंज हो जाता है।

2. RSI (Relative Strength Index) – Buying/Selling Zone.

रेंज: 0–100 ➡️ RSI < 30 → ओवरसोल्ड (पॉसिबल बाइंग ज़ोन)बनता है। यहां आपका RSI > 70 → ओवरबॉट (पॉसिबल सेलिंग ज़ोन) बन जाता है।👉 निफ्टी में सबसे अच्छा है चेक करना: RSI 40–60 ज़ोन → ट्रेंड स्ट्रेंथ ज़ोन

3. MACD – Power Trend Predictor.

MACD क्रॉसओवर = ट्रेंड में बदलाव।

MACD ज़ीरो से ऊपर = बुलिश सेंटिमेंट।

MACD ज़ीरो से नीचे = बेयरिश सेंटिमेंट।

4.VWAP – Intraday King Indicator.

इंट्राडे निफ़्टी ट्रेडर्स के लिए सबसे अच्छा।➡️ VWAP से ऊपर कीमत → खरीदने का झुकाव + VWAP से नीचे कीमत → बेचने का झुकाव।

5. Volume Indicator – Confirmation Tool.

बिना वॉल्यूम के ब्रेकआउट = रिस्की 👉 ब्रेकआउट + मज़बूत वॉल्यूम = ज़्यादा संभावना वाला ट्रेड

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6. Nifty 50 TradingView Strategy Breakdown (Beginners + Pro Guide)

♻️ Strategy 1: EMA+RSI Trend Strategy (Beginners Friendly) + टाइमफ्रेम: 15 मिनट / 5 मिनट।➡️ इंडिकेटर: EMA 20, EMA 50, रसी। खरीदने के नियम: = ✔ EMA 20 > EMA 50✔ RSI 40 से ऊपर ✔ कीमत EMA 20 को रीटेस्ट करती है। बेचने के नियम: = ✔ EMA 20 < EMA 50✔ RSI 60 से नीचे ✔ कीमत EMA की ओर वापस आती है

🧿 बिगिनर्स के लिए आसान और सुपर असरदार।

♻️ Strategy 2: Breakout + Volume Strategy (Pro Level) टाइमफ्रेम: कोई भी (15 मिनट रिकमेंडेड) नियम:➡️1. निफ्टी की सपोर्ट/रेजिस्टेंस ड्रॉ 2. ब्रेकआउट कैंडल मजबूत होनी चाहिए 3. वॉल्यूम हाई होना चाहिए 4. रीटेस्ट कन्फर्मेशन बेस्ट एंट्री पॉइंट

एग्जिट:👉 अगला रेजिस्टेंस या ट्रेलिंग स्टॉप लॉस।

♻️ Strategy 3: VWAP Intraday Strategy + टाइमफ्रेम: 1 मिनट / 5 मिनट।➡️खरीदें:👉VWAP से ऊपर कीमत + हायर-हाईज़ फॉर्मेशन।बेचें:➡️ VWAP से नीचे कीमत + लोअर-लोज़ फॉर्मेशन। यह वह स्ट्रेटेजी है जिसे इंस्टीट्यूशन फॉलो करते हैं हम इसे फुल डिटेल्स समझेंगे।👇

VWAP (वॉल्यूम वेटेड एवरेज प्राइस)🟢VWAP एक टेक्निकल इंडिकेटर है जिसे किसी दिए गए टाइम पीरियड में ट्रेड किए गए शेयरों की कुल वैल्यू को ट्रेड किए गए शेयरों के कुल वॉल्यूम से डिवाइड करके कैलकुलेट किया जाता है। यह इंडिकेटर ट्रेडर्स को किसी स्टॉक की एवरेज प्राइस समझने में मदद करता है।

लोअर-लोज़ फॉर्मेशन🟢लोअर-लोज़ फॉर्मेशन एक टेक्निकल पैटर्न है जिसमें स्टॉक की कीमत लगातार नीचे जाती है, जिससे डाउनट्रेंड बनता है। इस पैटर्न को एक पावरफुल सेल सिग्नल माना जाता है।

स्ट्रेटेजी🟢जब स्टॉक की कीमत VWAP से नीचे होती है और लोअर-लोज़ फॉर्मेशन बनाती है, तो इसे एक पावरफुल सेल सिग्नल माना जाता है। इस स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर्स करते हैं क्योंकि इससे उन्हें स्टॉक में डाउनट्रेंड पहचानने और उसके हिसाब से अपनी पोजीशन एडजस्ट करने में मदद मिलती है।

♻️यह स्ट्रैटेजी क्यों काम करती है?

1. VWAP एक पावरफुल सपोर्ट लेवल है: जब कोई स्टॉक की कीमत VWAP से नीचे गिरती है, तो यह एक पावरफुल सपोर्ट लेवल के ब्रेकआउट का सिग्नल देता है।

2. लोअर-लो फॉर्मेशन एक डाउनट्रेंड दिखाता है: जब कोई स्टॉक की कीमत एक लोअर-लो फॉर्मेशन बनाती है, तो यह एक डाउनट्रेंड दिखाता है। 3. इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर एक्टिविटी: जब इंस्टीट्यूशनल ट्रेडर इस स्ट्रैटेजी का इस्तेमाल करते हैं, तो वे एक साथ शेयर बेचते हैं, जिससे स्टॉक की कीमत और भी गिर जाती है।

यह स्ट्रैटेजी सभी स्टॉक पर लागू नहीं होती है, और इसे इस्तेमाल करने से पहले आपको अपने रिस्क मैनेजमेंट पर विचार करना होगा

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♻️ Strategy 4: Opening Range Breakout (ORB) Strategy.

टाइमफ्रेम: 5 मिनट + टाइम: पहले 15 मिनट की रेंज। खरीदें:➡️कीमत > ORB हाई + वॉल्यूम मज़बूत होता है।बेचें:➡️कीमत < ORB लो + वॉल्यूम मज़बूत होता है।👉 शुरुआती लोगों के लिए थोड़ी रिस्की लेकिन हाई रिवॉर्ड स्ट्रेटेजी आइए इसे डिटेल में समझते हैं।

ORB (ओपनिंग रेंज ब्रेकआउट)🟢ORB एक टेक्निकल पैटर्न है जिसमें किसी स्टॉक की कीमत एक खास टाइम पीरियड (आमतौर पर पहले 30 मिनट से 1 घंटे) में एक रेंज में ट्रेड होती है, जिसे “ओपनिंग रेंज” कहते हैं। जब इस रेंज के ऊपर या नीचे ब्रेकआउट होता है, तो ट्रेडर खरीदने या बेचने का फैसला करते हैं।

खरीदें: कीमत > ORB हाई + स्ट्रॉन्ग वॉल्यूम🟢 जब स्टॉक की कीमत ORB हाई से ऊपर जाती है और वॉल्यूम स्ट्रॉन्ग होता है, तो इसे खरीदने का सिग्नल माना जाता है। इसका मतलब है कि स्टॉक की कीमत में एक स्ट्रॉन्ग अपट्रेंड बन रहा है, और ट्रेडर खरीदने का फैसला कर सकते हैं।

बेचें: कीमत < ORB लो + स्ट्रॉन्ग वॉल्यूम 🟢जब स्टॉक की कीमत ORB लो से नीचे गिरती है और वॉल्यूम स्ट्रॉन्ग होता है, तो इसे बेचने का सिग्नल माना जाता है। इसका मतलब है कि स्टॉक की कीमत में एक स्ट्रॉन्ग डाउनट्रेंड बन रहा है, और ट्रेडर बेचने का फैसला कर सकते हैं। यह स्ट्रैटेजी इसलिए काम करती है क्योंकि इसको बड़े ऑपरेट ऑपरेट करते है। उनका मोमेंट से चलना छूटे ट्रेडर्स का सेफ जॉन माना जाता है।

1. ओपनिंग रेंज एक मुख्य सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल है: ORB हाई और लो मुख्य सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल हैं जो स्टॉक की कीमत पर असर डालते हैं।

2. वॉल्यूम एक मुख्य इंडिकेटर है: वॉल्यूम एक मुख्य इंडिकेटर है जो स्टॉक प्राइस में बदलाव दिखाता है।

3. ब्रेकआउट एक पावरफुल सिग्नल है: जब स्टॉक प्राइस ORB हाई या लो से ब्रेकआउट होता है, तो यह एक पावरफुल सिग्नल है जो स्टॉक प्राइस में एक मजबूत ट्रेंड दिखाता है।

यह स्ट्रैटेजी सभी स्टॉक पर लागू नहीं होती है, और इसे इस्तेमाल करने से पहले आपको अपने रिस्क मैनेजमेंट पर विचार करना होगा।

7. Nifty 50 Candle Patterns – Fast Guide.

बुलिश एंगल्फिंग → मजबूत अप मूव।

📊 बुलिश एंगुलफिंग एक पावरफुल कैंडलस्टिक पैटर्न है जो एक मजबूत ऊपर की ओर मूव का सिग्नल देता है। यह पैटर्न तब बनता है जब एक छोटी बेयरिश कैंडल के बाद एक बड़ी बुलिश कैंडल आती है जो पिछली कैंडल को पूरी तरह से घेर लेती है। इस पैटर्न को एक मजबूत बाय सिग्नल माना जाता है, क्योंकि यह बताता है कि बुल्स ने बेयर्स को हरा दिया है और अब वे कंट्रोल में हैं। इस पैटर्न के बाद अक्सर एक मजबूत ऊपर की ओर मूव होता है, जिससे ट्रेडर्स को काफी प्रॉफिट हो सकता है। यह पैटर्न सभी टाइमफ्रेम पर काम करता है

📉बेयरिश एंगल्फिंग → सेल प्रेशर।

बेयरिश एंगल्फिंग एक पावरफुल कैंडलस्टिक पैटर्न है जो मजबूत सेलिंग प्रेशर का सिग्नल देता है। यह पैटर्न तब बनता है जब एक छोटी बुलिश कैंडल के बाद एक बड़ी बेयरिश कैंडल आती है जो पिछली कैंडल को पूरी तरह से कवर कर लेती है।

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पैटर्न की खासियतें:

1. पहली कैंडल: एक छोटी बुलिश कैंडल, जो यह बताती है कि मार्केट में अभी भी कुछ खरीदारी हो रही है।

2. दूसरी कैंडल: एक बड़ी बेयरिश कैंडल, जो पिछली कैंडल को पूरी तरह से कवर कर लेती है। यह दिखाता है कि सेलिंग प्रेशर बढ़ गया है और सेलर्स ने मार्केट पर कंट्रोल कर लिया है।

इस पैटर्न का मतलब:

बेयरिश एंगल्फिंग पैटर्न यह दिखाता है कि सेलिंग प्रेशर बढ़ गया है और सेलर्स ने मार्केट पर कंट्रोल कर लिया है। इस पैटर्न को एक मजबूत सेल सिग्नल माना जाता है, और ट्रेडर्स इसे देखकर अपने शेयर बेचने का फैसला कर सकते हैं।

इस पैटर्न के बाद क्या होता है?

बेयरिश एंगल्फिंग पैटर्न के बाद अक्सर एक मजबूत डाउनवर्ड मूव होता है, जिससे ट्रेडर्स को काफी प्रॉफिट हो सकता है। इसलिए, यह पैटर्न ट्रेडर्स के लिए अपने शेयर बेचने का फैसला करने का एक जरूरी सिग्नल है

हैमर → ट्रेंड रिवर्सल अप

हैमर एक पावरफुल कैंडलस्टिक पैटर्न है जो एक मज़बूत ट्रेंड रिवर्सल अप का सिग्नल देता है। यह पैटर्न तब बनता है जब एक छोटी कैंडल के साथ एक लंबी लोअर शैडो होती है, जो मार्केट में बढ़ते बाइंग प्रेशर को दिखाता है। हैमर पैटर्न को एक मज़बूत बाइंग सिग्नल माना जाता है, क्योंकि यह बताता है कि बेयर्स ने अपनी ताकत खो दी है और बुल्स ने कंट्रोल कर लिया है। यह पैटर्न अक्सर एक मज़बूत अप मूव का सिग्नल देता है, जिससे ट्रेडर्स को अच्छा-खासा प्रॉफ़िट हो सकता है।

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शूटिंग स्टार → रिवर्सल डाउन

शूटिंग स्टार एक पावरफुल कैंडलस्टिक पैटर्न है जो एक मज़बूत डाउनवर्ड रिवर्सल का सिग्नल देता है। यह पैटर्न तब बनता है जब एक छोटी बॉडी वाली कैंडल के साथ एक लंबी अपर शैडो होती है, जो मार्केट में सेलिंग प्रेशर बढ़ने का संकेत देती है। पैटर्न की खासियतें:👇

1. स्मॉल बॉडी: शूटिंग स्टार की बॉडी छोटी होती है, जो यह दिखाती है कि मार्केट में खरीदने और बेचने का प्रेशर लगभग बराबर है।

2. लॉन्ग अपर शैडो: शूटिंग स्टार की अपर शैडो लंबी होती है, जो मार्केट में सेलिंग प्रेशर बढ़ने का संकेत देती है।

3. लो या नो लोअर शैडो: शूटिंग स्टार की लोअर शैडो लो या नो लोअर शैडो होती है, जो मार्केट में कम खरीदने का प्रेशर दिखाता है।

इस पैटर्न का मतलब:➡️ शूटिंग स्टार पैटर्न यह दिखाता है कि मार्केट में सेलिंग प्रेशर बढ़ गया है और बुल्स ने अपनी ताकत खो दी है। इस पैटर्न को एक मज़बूत सेल सिग्नल माना जाता है, और ट्रेडर्स इसे देखकर अपने शेयर बेचने का फैसला कर सकते हैं।

इनसाइड कैंडल → ब्रेकआउट जल्द ही आ रहा है।

इनसाइड कैंडल एक शक्तिशाली कैंडलस्टिक पैटर्न है जो एक मजबूत ब्रेकआउट का संकेत देता है। यह पैटर्न तब बनता है जब एक कैंडल पूरी तरह से पिछली कैंडल के अंदर होती है, जो दर्शाती है कि बाजार में उतार-चढ़ाव कम हो गया है। इनसाइड कैंडल पैटर्न एक मजबूत ब्रेकआउट का संकेत देता है, जो जल्द ही आने वाला है। यह पैटर्न ट्रेडर्स को अपने शेयर खरीदने या बेचने का निर्णय लेने में मदद करता है, और उन्हें एक मजबूत मूव के लिए तैयार करता है। ब्रेकआउट की दिशा का अनुमान लगाने के लिए अन्य संकेतकों का उपयोग करना आवश्यक है।👉 ये पैटर्न ट्रेडिंगव्यू में आसानी से देखे जा सकते हैं।

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8. Beginners Nifty Trading Guide —Edition.

1. एनालिसिस से शुरू करें, इमोशन से नहीं निफ्टी का अंदाज़ा न लगाएं, उसे देखें।

3. छोटे पोजीशन साइज़ से शुरू करें पहले महीने सिर्फ़ सीखें + एनालिसिस करें।

4. स्टॉप लॉस ज़रूरी है ज़्यादातर बिगिनर्स इस प्रॉब्लम से परेशान रहते हैं।

5. ओवरट्रेडिंग से बचें रोज़ 1–2 क्वालिटी ट्रेड = सेफ़ + फ़ायदेमंद।

6. रोज़ ग्लोबल मार्केट चेक करें। 1.SGX निफ्टी 2.डॉव जोन्स 3.क्रूड ऑयल 4. USD/INR ➡️ये सभी निफ्टी को मूव करते हैं

9. Daily Nifty Trading Routine (Pro Trader Style)

मॉर्निंग रूटीन (मार्केट से पहले)✅SGX निफ्टी चेक ✅पिछले दिन का हाई-लो✅ज़रूरी खबर✅ सपोर्ट/रेजिस्टेंस लेवल✅ मार्केट के दौरान✅वॉल्यूम + प्राइस एक्शन देखें✅ट्रेंड फॉलो करें✅ब्रेकआउट कन्फर्मेशन✅मार्केट के बाद✅जर्नल राइटिंग✅ट्रेड रिव्यू ✅लर्निंग नोट्स👉 यह रूटीन डिसिप्लिन बनाता है

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10. Common Mistakes Beginners Must Avoid.

ज़्यादा लेवरेज का इस्तेमाल करना।➡️ कोई स्टॉप लॉस नहीं+1 प्रॉफ़िट के बाद ओवरकॉन्फिडेंस✅अफ़वाहों पर ध्यान देना✅गलत टाइमफ़्रेम चुनना✅इंडिकेटर ओवरलोड करना✅याद रखें: कम इंडिकेटर = ज़्यादा क्लैरिटी।

11.Nifty 50: Companies Count & Establishment.

निफ्टी 50 इंडेक्स में भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में लिस्टेड ठीक 50 लार्ज-कैप कंपनियां शामिल हैं, जिन्हें मार्केट कैपिटलाइज़ेशन, लिक्विडिटी और ट्रेडिंग वॉल्यूम के आधार पर ध्यान से चुना गया है। ये 50 कंपनियां भारत की अर्थव्यवस्था के अलग-अलग हिस्सों को दिखाती हैं, जिसमें बैंकिंग, फाइनेंस, IT, कंज्यूमर गुड्स, एनर्जी और हेल्थकेयर जैसे सेक्टर शामिल हैं—जो इसे भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए एक बड़ा बेंचमार्क बनाता है।

निफ्टी 50 इंडेक्स ऑफिशियली 22 अप्रैल, 1996 को शुरू (लॉन्च) हुआ था, जिसकी बेस डेट 3 नवंबर, 1995 और बेस वैल्यू 1000 पॉइंट्स थी। अपनी शुरुआत से ही, यह स्टॉक मार्केट परफॉर्मेंस के लिए भारत के सबसे ज़्यादा ट्रैक किए जाने वाले बेंचमार्क में से एक बन गया है। और NSE 1992 मे वजूद में आया जो सबसे ज्यादा लोकप्रिय प्लेटफॉर्म हैं।

12. Risk Management (Most Important Part)

प्रोफेशनल हमेशा रिस्क मैनेज करते हैं।➡️हर ट्रेड पर रिस्क: 1–2%✅स्टॉप लॉस: हमेशा फिक्स्ड✅रिवेंज ट्रेडिंग से बचें✅हफ्ते के नुकसान की लिमिट कैसे सेट करें✅अच्छी ट्रेडिंग = 80% रिस्क मैनेजमेंट + 20% एनालिसिस।

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13. Final conclusions.

अगर आप सही तरीका अपनाते हैं, तो TradingView पर Nifty 50 को एनालाइज़ करना आसान है। इंडिकेटर + प्राइस एक्शन + वॉल्यूम + डिसिप्लिन — ये चार चीज़ें आपको हमेशा सही दिशा दिखाती हैं। Nifty ट्रेडिंग में सब्र और फोकस सबसे बड़े हथियार हैं। अगर आप रोज़ 30 मिनट सीखते हैं, तो आप 30 दिनों के अंदर चार्ट पढ़ पाएंगे।

डिस्क्लेमर – शब्द

यह आर्टिकल सिर्फ़ एजुकेशनल और जानकारी के मकसद से है। यहां बताए गए Nifty 50 एनालिसिस, TradingView टूल्स, इंडिकेटर्स और ट्रेडिंग स्ट्रेटेजी का मकसद फाइनेंशियल सलाह या प्रॉफिट की गारंटी देना नहीं है। स्टॉक मार्केट अपने आप में रिस्की होता है, और ग्लोबल न्यूज़, इकोनॉमिक बदलाव या मार्केट सेंटिमेंट के आधार पर कीमतें कभी भी तेज़ी से बदल सकती हैं।

कोई भी ट्रेड करने से पहले अपनी समझ, रिसर्च और सही रिस्क मैनेजमेंट का इस्तेमाल ज़रूर करें। इस आर्टिकल में बताई गई EMA, RSI, VWAP, या ब्रेकआउट स्ट्रेटेजी सिर्फ़ एजुकेशनल मकसद के लिए हैं; उन्हें बिना सोचे-समझे इस्तेमाल न करें। पिछला परफॉर्मेंस भविष्य में सफलता पक्की नहीं करता।

अगर आपको प्रोफेशनल सलाह चाहिए, तो SEBI-रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर से गाइडेंस लेना सबसे अच्छा है। इस आर्टिकल का न तो लेखक और न ही पब्लिशर इस कंटेंट के आधार पर किसी भी प्रॉफिट या लॉस की ज़िम्मेदारी लेता है। समझदारी और डिसिप्लिन के साथ ट्रेड करें

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6 thoughts on “Nifty 50 TradingView Complete Guide (Beginners + Strategy + Indicators)”

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